ईद-ए-मिलाद उन नबी की तैयारी जोरों पर
मस्जिदों की सजावट के साथ विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी में जुटे हैं।
डुमरियागंज में ईद-ए-मिलाद उन नबी का त्योहार बुधवार 26 अगस्त को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसे लेकर डुमरियागंज क्षेत्र में तैयारियां जोरों पर हैं। मुस्लिम समाज के लोग घरों और मस्जिदों की सजावट के साथ विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी में जुटे हैं।



डुमरियागंज कस्बे के बैदोला स्थित उर्दू शिक्षण संस्थान के मौलाना मकसूद अकरम ने शनिवार रात हल्लौर में आयोजित तकरीर में बताया कि इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक 12 रबीउल अव्वल को ईद-ए-मिलादुन्नबी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्म अरब के मक्का शहर में 571 ईस्वी में हुआ था।
उन्होंने बताया कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने दुनिया को आपसी प्रेम, एकता, भाईचारे और शांति का संदेश दिया। उनके जीवन और शिक्षाओं से लोगों को मानवता तथा सद्भाव की प्रेरणा मिलती है।
ईद-ए-मिलाद उन नबी पर्व का महत्व
मुस्लिम समाज में ईद-ए-मिलादुन्नबी पर्व का विशेष महत्व है। इस अवसर पर लोग नए कपड़े पहनते हैं और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। कई स्थानों पर जुलूस निकाला जाता है, कुरआन की तिलावत और विशेष नमाज अदा की जाती है। गरीबों और जरूरतमंदों को दान, भोजन तथा मिठाइयां वितरित की जाती हैं।
धार्मिक आयोजनों में पैगंबर मोहम्मद साहब की शिक्षाओं और उनके जीवन पर तकरीरें की जाती हैं। लोगों से आपसी भाईचारा, प्रेम और शांति बनाए रखने की अपील की जाती है।
कार्यक्रम के दौरान रशीद अहमद फारूकी, मोहम्मद अकबर





